
नई दिल्ली में आयोजित भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को लेकर भारत में अपार उत्साह और विश्वास है, जबकि पश्चिमी देश इस उभरती तकनीक से आशंकित हैं।
मेटा के मुख्य एआई अधिकारी अलेक्जेंडर वांग के साथ बातचीत में सुनक ने इस विश्वास के अंतर को पाटने के लिए नीतिगत प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने सभा को बताया कि भारत का डिजिटल क्षेत्र महत्वाकांक्षाओं से भरा है और हालिया एआई निवेशों का पैमाना अभूतपूर्व है।
इस वर्ष प्रमुख एआई कंपनियां मैनहट्टन प्रोजेक्ट के खर्च से 20 गुना अधिक राशि निवेश करने जा रही हैं, जिन्होंने इसकी तुलना की। वांग ने भारत के वैश्विक एआई पारिस्थितिकी में बढ़ते योगदान की प्रशंसा की और कहा कि यहां अब अमेरिका से अधिक उपभोक्ता एआई स्टार्टअप्स हैं।
16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में चल रहे इस शिखर सम्मेलन में विश्व के नीति निर्माता, उद्योगपति, विद्वान और नवाचारी एक मंच पर हैं। सुनक की यह टिप्पणी एआई के भविष्य को आकार देने में भारत की भूमिका को रेखांकित करती है।
पश्चिमी चिंताओं के बीच भारत का आशावाद तकनीकी प्रगति को गति दे सकता है, बशर्ते वैश्विक सहयोग मजबूत हो। यह समिट एआई शासन के नए मानकों की दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है।