
भोपाल की विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत भाजपा सरकार का तीसरा बजट विवादों में घिर गया है। सरकार इसे सभी वर्गों के हित में बताती है, लेकिन विपक्ष ने इसे जनविरोधी करार दिया। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने इसे ‘लोगों को ठगने वाला बजट’ बताते हुए कड़ी आलोचना की।
मीडिया से बातचीत में पटवारी ने कहा कि 4.38 लाख करोड़ का यह विशालकाय बजट दिखावटी है। राजकोषीय घाटे का इंतजाम कैसे होगा, इसका कोई खाका नहीं। पिछला बजट आधा भी खर्च न हो सका। 33 बंद योजनाओं के लिए एक पैसा नहीं। ऐसा प्रतीत होता है मानो मध्यप्रदेश केंद्र का उपनिवेश बन गया हो।
उन्होंने व्यंग्य किया कि कुत्तों की नसबंदी के बजाय सरकार को अपने भ्रष्टाचार की नसबंदी करनी चाहिए। यही प्रदेश को आर्थिक संकट से उबार सकता है। उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार ने स्वयं 74,000 करोड़ के घाटे को स्वीकारा है। खजाना खाली, फिर वादों का क्या आधार?
बजट में किसानों की आय दोगुनी करने, युवाओं को नौकरी या कर्मचारियों के महंगाई भत्ते का कोई जिक्र नहीं। बिजली महंगी हो रही है, राहत की घोषणा शून्य, लेकिन निजी कंपनियों को लाभ। सोशल मीडिया पर सिंघार ने उजागर किया कि 6 लाख करोड़ का कर्ज, प्रति व्यक्ति 60 हजार का बोझ। किसानों पर लाखों का कर्ज।
राजस्व का 16 फीसदी ब्याज चुकाने में चला जाता है। 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित, लेकिन किसानों के लिए बजट शून्य। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के 33 लाख करोड़ निवेश के दावे पर पिछले आंकड़े गायब। नौकरियों का कोई डेटा नहीं। विपक्ष की यह मुखरता राज्य की आर्थिक दशा पर सवाल खड़े कर रही है।