
भागलपुर के समाहरणालय में हड़कंप मच गया जब जिलाधिकारी को उनके आधिकारिक ईमेल पर भयानक धमकी मिली। संदेश में दावा किया गया कि डीएम चैंबर के पास पांच आरडीएक्स विस्फोटक लगाए गए हैं और रिमोट से विस्फोट करने वाले सदस्य मौके पर तैनात हैं।
ईमेल भेजने वाले ने खुद को लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) और पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़ा बताया। साथ ही तमिलनाडु से जुड़ी विचित्र मांगें रखीं- अभिनेता एस.वी. शेखर स्ट्रीट का नाम पेरियार अंबेडकर स्ट्रीट करने और वहां ईडब्ल्यूएस आरक्षण बंद करने की।
धमकी मिलते ही कलेक्ट्रेट परिसर खाली करा लिया गया। बम निरोधक दलों ने घंटों तलाशी ली, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला। फिर भी पूरा दिन काम ठप रहा और आम लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया।
यह कोई पहला मामला नहीं। जनवरी 28 और फरवरी 9 को सिविल कोर्ट को उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। अब साइबर सेल जांच में जुट गई है, लेकिन भेजने वाले की पहचान अभी तक नहीं हो सकी।
लगातार धमकियां सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठा रही हैं। आखिर ये कौन हैं जो बार-बार प्रशासन को ललकार रहे हैं? मजबूत साइबर निगरानी और खुफिया तंत्र की जरूरत है ताकि ऐसी घटनाएं रुक सकें।