
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के रोबोट प्रदर्शन को लेकर उठे विवाद को पीछे छोड़ते हुए भारत की एआई क्षमताओं का लोहा मनवाया है। यह समिट देश को वैश्विक एआई महाशक्ति बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई।
देशभर से सैकड़ों स्टॉल्स ने स्वदेशी फाउंडेशनल मॉडल्स, स्वायत्त ड्रोन और ग्रामीण चुनौतियों के समाधान पेश किए। ये प्रदर्शन भारत के एआई इकोसिस्टम की गहराई को उजागर करते हैं।
भारतजेन एआई ने 22 आधिकारिक भाषाओं में मॉडल विकसित कर भाषाई बाधाओं को तोड़ने का संकल्प लिया है, ताकि एआई हर नागरिक तक पहुंचे। वहीं, पैराडाइमआईटी का सॉवरेन एआई बॉक्स डेटा सुरक्षा को मजबूत कर आत्मनिर्भरता की राह प्रशस्त कर रहा है।
स्टार्टअप्स ने कमाल दिखाया। स्काई एयर मोबिलिटी ने 36 लाख ऑटोमेटेड डिलीवरी और 1000 टन कार्बन बचत का रिकॉर्ड गढ़ा। तारकराम मारम की एआई ट्रेनर मशीन शिक्षा को सुलभ बना रही है।
फ्रंटियर मार्केट्स ने ग्रामीण महिलाओं को एआई से सशक्त बनाया, जबकि ड्रब्लेट इनोवेशन के युवा संस्थापकों ने रोबोटिक्स में नई ऊंचाइयां छुईं। बिहार जैसे राज्यों के पवेलियन ने स्थानीय समस्याओं पर एआई फोकस दिखाया।
यह समिट साबित करता है कि भारत एआई में न केवल भागीदार है, बल्कि अगुआ बनने को तैयार है। विवाद भले सुर्खियां बटोरें, लेकिन नवाचार ही असली कहानी है।