
हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की चमकती तारिका निम्मी, जिनका जन्म नाम नवाब बानो था, आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हैं। 18 फरवरी को उनकी जयंती पर जानिए उनके नाम के पीछे का मजेदार किस्सा और फिल्म ‘आन’ में मंगला बनी उनकी अमर भूमिका।
आगरा के मुस्लिम परिवार में जन्मीं निम्मी के नाना छोटे जमींदार थे। ब्रिटिश राज से ‘नवाब’ की उपाधि पाने का सपना उनके मन में बसा था, जो कभी पूरा न हुआ। निम्मी के जन्म पर घर में खुशी का ठिकाना न रहा। नानी ने नाना को बताया, ‘बेटी हुई है।’ नाना ने फौरन कहा, ‘नाम नवाब रख दो, उपाधि दे दो!’ लड़की होने का हवाला देने पर भी वे न टरे। इस तरह नाम पड़ा नवाब बानो।
फिल्मों में कदम रखते ही राज कपूर ने उन्हें निम्मी नाम दिया, जो उनकी मासूमियत से खूब जंचता था। ‘बरसात’, ‘दीदार’, ‘आन’, ‘उड़न खटोला’ जैसी कालजयी फिल्मों में उन्होंने जलवा बिखेरा। महबूब खान की 1952 की ‘आन’ में ग्रामीण मंगला का किरदार घर-घर मशहूर हो गया। लंदन के रियाल्टो में ‘सेवेज प्रिंसेस’ के नाम से रिलीज हुई इस फिल्म का प्रीमियर यादगार रहा।
‘इंडिया की अनकिस्ड गर्ल’ के नाम से मशहूर निम्मी ने कभी स्क्रीन किस नहीं किया। प्रीमियर में निर्देशक के हाथ चूमने से इनकार कर दिया। हॉलीवुड के लालच को भी ठुकराया। छोटी उम्र में मां को खोया, स्कूल न जा सकीं, लेकिन ‘अंदाज’ सेट पर राज कपूर ने ‘बरसात’ दी और राखी बांधकर भरोसा दिलाया।
निम्मी की जिंदगी सादगी और सिद्धांतों का पैगाम है। उनका योगदान भारतीय सिनेमा को हमेशा प्रेरित करेगा।