
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति वित्त वर्ष 2027 में नीतिगत ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने पर विचार कर सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई में मामूली वृद्धि की आशंका जताई गई है, जो इस रुख का मुख्य आधार है।
खाद्य महंगाई के सामान्य स्तर पर लौटने से सीपीआई में इजाफा संभव है, लेकिन कच्चे तेल की नरम कीमतें और वर्ष की पहली छमाही में जीएसटी में कटौती के फायदे गैर-खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखेंगे। यह संतुलन आरबीआई को स्थिरता बनाए रखने का मौका देता है।
आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर सकल घरेलू उत्पाद की दर 2011-12 आधार श्रृंखला के अनुसार 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। डिफ्लेटर में वृद्धि वास्तविक विकास पर असर डाल सकती है, मगर केंद्र की पूंजीगत व्यय नीति और निजी निवेश में सुधार अर्थव्यवस्था को बल प्रदान करेंगे।
अमेरिका-भारत व्यापार समझौते से रुपया मजबूत हुआ है और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की वापसी के संकेत दिख रहे हैं। मार्च 2027 तक रुपया 89 डॉलर प्रति पर स्थिर होने की उम्मीद है।
16 फरवरी तक फरवरी में एफपीआई ने 2.8 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश किया, जिससे रुपया जनवरी अंत के 92 से 90.7 पर आ गया। नीतिगत दरें स्थिर रहेंगी, लेकिन पिछली बढ़ोतरी का प्रभाव ब्याज दरों पर बना रहेगा।
क्रिसिल वित्तीय स्थिति सूचकांक जनवरी में -0.5 पर टिका, जो थोड़ी सख्ती दर्शाता है। आरबीआई के ओएमओ और स्वैप से तरलता मजबूत हुई। 125 आधार अंकों की कटौती से ऋण दरें घटीं और बैंकिंग उन्नति हुई।