
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ वर्षों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार किए हैं। पहले बीमारू राज्य के तमगे से जाना जाने वाला यह प्रदेश अब स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत मॉडल बन गया है। ग्रामीण व दूरदराज इलाकों में सीएचसी और पीएचसी की संख्या बढ़ाने के साथ इन्हें आधुनिक उपकरणों व विशेषज्ञ डॉक्टरों से लैस किया गया है।
2017 से सैकड़ों नए स्वास्थ्य केंद्र स्थापित हुए और पुराने उच्चीकृत। अब इनमें 24×7 प्रसव, पैथोलॉजी, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड व जीवनरक्षक दवाएं उपलब्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मां-बच्चे के स्वास्थ्य पर जोर से संस्थागत प्रसव दर में इजाफा हुआ। ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र से अंतिम व्यक्ति तक सेवाएं पहुंचीं।
डॉक्टरों व स्टाफ की भर्ती तेज हुई, पद भर गए। डिजिटल सर्विलांस से डेंगू, मलेरिया जैसे रोगों पर अंकुश लगा। लैबों की संख्या बढ़ी, मृत्यु दर घटी। आयुष्मान भारत व जन आरोग्य योजना से लाखों को 5 लाख तक मुफ्त इलाज, पीएचसी ने ग्रामीणों को जोड़ा।
मेडिकल कॉलेज बने, जिला अस्पताल मजबूत। 102-108 एम्बुलेंस व टेलीमेडिसिन से आपात सहायता। कोविड में गांव-गांव स्क्रीनिंग-टीकाकरण से देश में शीर्ष स्थान। ऑक्सीजन प्लांट, आईसीयू बेड आज भी उपयोगी।
मातृ-शिशु मृत्यु दर घटी, टीकाकरण बेहतर, रोग नियंत्रण। बजट वृद्धि से प्राथमिक स्वास्थ्य प्राथमिक। ई-संजीवनी से घर बैठे सलाह। यह परिवर्तन जमीनी है, प्रदेश स्वस्थ दिशा में अग्रसर।