
नई दिल्ली में भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का दूसरा दिन जोरदार चर्चाओं के साथ बीता। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विशेष बातचीत में कहा कि देश के युवाओं को एआई आधारित शिक्षा मुहैया कराना सरकार का प्रमुख दायित्व है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह समिट छात्रों, शिक्षकों और विशेषज्ञों में अपार उत्साह भर रही है, जहां बड़ी संख्या में लोग जुटे हैं।
समिट का केंद्रबिंदु है एआई इन एजुकेशन और एजुकेशन इन एआई। पारंपरिक भारतीय ज्ञान से लेकर वैश्विक स्तर तक एआई छात्रों व शिक्षकों को मजबूत करेगा। स्कूल-कॉलेजों की प्रशासनिक व्यवस्था को भी अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई जागरूकता से भारत विश्व पटल पर नेतृत्व करेगा और यह समिट उस दिशा में मील का पत्थर है। कौशल विकास राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने बताया कि एआई शिक्षा पर व्यापक असर डालेगा, इसलिए शिक्षकों की ट्रेनिंग और शैक्षिक ढांचे का पुनर्निर्माण जरूरी है।
आईआईटी मद्रास को एआई-शिक्षा केंद्र ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है, जो एआई के प्रभाव, तैयारियों और सुधारों का अध्ययन करेगा। निदेशक वी. कामकोटि ने चार स्तरों पर बदलाव गिनाए- छात्र बेझिझक सवाल पूछ सकेंगे, अभिभावक बच्चों की प्रतिभा पहचान सकेंगे, शिक्षक कमजोरियां सुधार सकेंगे और नीति-निर्माता डेटा से बेहतर फैसले लेंगे।
यह समिट भारत की तकनीकी शिक्षा क्रांति की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।