
नई दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के एकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूली से उच्चतर एवं व्यावसायिक शिक्षा तक एआई के उपयोग की विस्तृत रूपरेखा तैयार की है। इस प्रक्रिया में शिक्षा संस्थानों, उद्योग क्षेत्र और स्टार्टअप्स के साथ गहन विचार-विमर्श किया गया।
मंगलवार को भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के दौरान एक महत्वपूर्ण सत्र में इस पर चर्चा हुई। ‘मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन: पुशिंग द फ्रंटियर ऑफ एआई इन इंडिया’ शीर्षक वाले इस सत्र में शीर्ष विशेषज्ञों ने नीति, प्रौद्योगिकी एवं संस्थागत स्तर पर शिक्षा परिवर्तन के उपाय सुझाए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह समिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी दृष्टिकोण का परिणाम है। उन्होंने बताया कि विश्व भारत को एआई अपनाने में अग्रणी मान रहा है। एआई भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाएगा और विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करेगा।
युवाओं पर बल देते हुए प्रधान ने कहा कि शिक्षा में एआई का उपयोग और एआई की शिक्षा दोनों आवश्यक हैं। युवा यदि एआई का सदुपयोग करेंगे तो नवीन पहल करेंगे और भारत को विश्व पटल पर शीर्ष स्थान दिलाएंगे। राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने चर्चाओं को उपयोगी बताते हुए प्रारंभिक शिक्षा से कौशल विकास, अनुसंधान तक एआई एकीकरण पर जोर दिया।
मंत्रालय ने पिछले दस वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म, नई नीतियां एवं क्षमता निर्माण से आधार तैयार किया। आईआईटी मद्रास में एआई फॉर एजुकेशन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित हुआ। ‘भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026’ में जिम्मेदार एआई पर बल दिया गया। अब योजना से कार्यान्वयन की ओर बढ़ते हुए सरकार, उद्योग एवं संस्थान मिलकर शिक्षा को भविष्यसिद्ध बनाने को तत्पर हैं।