
बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली के भाई, रिटायर्ड मेजर विक्रांत कुमार जेटली पिछले एक साल से संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत की चपेट में हैं। यह मामला भारत-यूएई के बीच कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान विदेश मंत्रालय ने बताया कि 13 फरवरी को विक्रांत से कांसुलर मुलाकात नहीं हो सकी। अबू धाबी में भारतीय दूतावास के औपचारिक अनुरोध के बावजूद यूएई अधिकारियों ने अनुमति देने से इनकार कर दिया।
मंत्रालय ने अगली मुलाकात की व्यवस्था के लिए अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को निर्धारित की गई है।
विक्रांत की पत्नी ने इन-कैमरा सुनवाई की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए पारदर्शिता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि खुली सुनवाई से सभी पक्षों को न्यायपूर्ण प्रक्रिया का पालन करने का मौका मिलेगा।
कोर्ट ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय को विक्रांत को कानूनी सहायता और कांसुलर सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। पिछले साल सेलिना ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनके भाई को 2024 से यूएई में गैरकानूनी हिरासत में रखा गया है।
2016 से दुबई में रह रहे विक्रांत मैटिटी ग्रुप से जुड़े थे, जो व्यापार, परामर्श और जोखिम प्रबंधन का कार्य करती है। सेलिना की अपील ने उनके भाई की सुरक्षित वापसी की मांग की थी।
यह केस न केवल पारिवारिक संकट को उजागर करता है, बल्कि भारतीय नागरिकों के विदेशी हिरासत मामलों में कूटनीतिक प्रयासों की अहमियत भी रेखांकित करता है। चार सप्ताह में क्या बदलाव आता है, यह देखना बाकी है।