
भारत का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) क्षेत्र अभूतपूर्व गति से बढ़ रहा है। पिछले दो वर्षों में 200 से ज्यादा नए केंद्र स्थापित हो चुके हैं और अगले तीन-चार सालों में कुल फुटप्रिंट 350 मिलियन वर्ग फुट को पार कर सकता है। जेएलएल की ताजा रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी गई है।
2025 में जीसीसी लीजिंग ने रिकॉर्ड 31 मिलियन वर्ग फुट का आंकड़ा छुआ, जो बड़े शहरों में हो रहे परिवर्तन को दर्शाता है। बेंगलुरु 34-39 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, जहां 900 से अधिक यूनिट्स सक्रिय हैं। हैदराबाद हेल्थकेयर-बायोटेक में अग्रणी हैदराबाद 20-23 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर है।
पुणे ने पिछले चार वर्षों में 15-20 प्रतिशत की मजबूत मौजूदगी बनाई है, जो जीवनशैली, कुशल मानव संसाधन और स्थानिक लाभों से कंपनियों को लुभा रहा है। जेएलएल के चीफ इकोनॉमिस्ट डॉ. समंतक दास कहते हैं, ‘ये आंकड़े निरंतर विकास की मजबूत कहानी बयां करते हैं। 90 प्रतिशत से अधिक गतिविधियां टियर-1 शहरों तक सीमित हैं, जहां 263 मिलियन वर्ग फुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस उपलब्ध है।’
टियर-2 शहर भी पीछे नहीं हैं। अहमदाबाद का औद्योगिक कॉरिडोर और गिफ्ट सिटी, कोलकाता व जयपुर की सांस्कृतिक छटा व्यापारिक केंद्र बन रही है। यह केवल फैलाव नहीं, बल्कि रणनीतिक विस्तार है जो मजबूत अर्थव्यवस्था पर टिका है। भारत का जीसीसी परिदृश्य नौकरियों, नवाचार और रियल एस्टेट को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।