
राष्ट्रीय जनता दल के संरक्षक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को देवघर जिला कोषागार घोटाले में मिली सजा के निलंबन को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका पर अप्रैल से सुनवाई करने का फैसला सुनाया है। सीबीआई का कहना है कि दोषी सिद्ध होने के बावजूद आरोपी खुले घूम रहे हैं, जो न्याय के खिलाफ है।
मामला 1990-94 के बीच का है जब देवघर ट्रेजरी से पशुपालन विभाग के 4.7 करोड़ के फंड से 89 लाख रुपये फर्जी रसीदों के जरिए उड़ाए गए। विशेष सीबीआई अदालत ने 2017 में लालू को 3.5 साल की कैद की सजा सुनाई थी। आरोप था कि उन्होंने अपनी हैसियत का दुरुपयोग कर जांच की फाइलें अपने पास रोक ली थीं।
मंगलवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच के समक्ष सुनवाई हुई। सीबीआई के वकील ने जोर देकर कहा कि दोषसिद्धि के बाद आरोपी अवैध रूप से बाहर हैं। अदालत ने लंबित फाइलों पर नाराजगी जताई और मृत प्रतिवादियों के केस बंद करने के निर्देश दिए।
यह घोटाला चारा घोटाले का हिस्सा है जिसमें लालू को चाईबासा, दुमका और डोरंडा जैसे चार अन्य मामलों में भी सजा हो चुकी है। स्वास्थ्य आधार पर उन्हें जमानत मिली हुई है। अप्रैल की सुनवाई से लालू के राजनीतिक भविष्य पर असर पड़ सकता है।
यह मामला भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायिक लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला न केवल लालू बल्कि अन्य प्रभावशाली नेताओं के लिए मिसाल कायम करेगा।