
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के धरदेई गांव में एक ऐसी घटना घटी जिसने सबके होश उड़ा दिए। बेटे आदित्य की सड़क दुर्घटना में मौत के दो साल बाद उसके माता-पिता ने घर के आंगन में लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महाशिवरात्रि की रात यह दर्दनाक कदम उठाया गया। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मौके से चार पन्नों का सुसाइड नोट बरामद किया।
कृष्णा पटेल, जो राजमिस्त्री थे, और उनकी पत्नी अपने इकलौते बेटे आदित्य को जीवन का आधार मानते थे। नोट में आदित्य को पुत्र, मित्र और पिता तुल्य बताया गया है। उन्होंने लिखा कि आदित्य भगवान का वरदान था जिसने उनके जीवन को खुशियों से भर दिया। लेकिन 2024 में हुए हादसे ने सब छीन लिया।
नोट में एक घटना का जिक्र है जब कृष्णा ने आदित्य को धौराभाटा यज्ञ प्रचार और मंदिर नक्शे के काम पर भेजा,尽管 उसकी अनिच्छा के बावजूद। इसे जीवन की सबसे बड़ी गलती बताया गया। ‘हम अपनी मर्जी से भगवान शंकर को अर्पण कर रहे हैं, किसी को दोष नहीं,’ लिखा है। वीडियो में वकील से बेटे के क्लेम पैसे बड़े भाई तक पहुंचाने की गुजारिश की।
गांववाले बताते हैं कि दंपति बेटे के जाने के बाद पूरी तरह टूट चुके थे। यह घटना मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाती है। पुलिस जांच कर रही है, लेकिन परिवार का दर्द समाज के लिए सबक है।