
मुंबई। असम के मशहूर गायक पापोन उर्फ अंगाराग महंत ने सोम सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी के उन सुनहरे लम्हों को ताजा किया, जब दुनिया एक खेल का मैदान लगती थी। उन्होंने एक दुर्लभ पुरानी तस्वीर साझा की, जो उनके संघर्षमय शुरुआती दिनों की याद दिलाती है।
कैप्शन में उन्होंने लिखा, ‘वह दौर था जब आसमान से भी बड़ी दुनिया लगती। हर राह न्योता देती, हर दिन खाली कागज सरीखा। कल से डर न था, भरोसा था। जिंदगी कठिन न थी, खेल का मैदान थी।’ यह पोस्ट लाखों प्रशंसकों के दिलों को छू गई।
कमेंट्स में फैंस ने उनकी तारीफों के पुल बांधे और अपनी कहानियां साझा कीं। पापोन ने असमिया लोक संगीत को देशभर में पहचान दिलाई। ‘मोरा पिया’, ‘काहे रे’, ‘बुलबुल’ जैसे गीत उनकी पहचान हैं।
हिंदी, असमिया, बंगाली भाषाओं में उनकी प्रतिभा चमकी। ‘पापोन एंड द ईस्ट इंडिया कंपनी’ बैंड के लीडर हैं वे। संगीत घराना मिला—मां-बाप गायक, पिता ‘बिहू किंग’। आर्किटेक्चर छोड़ 2004 में ‘जोनाकी राती’ से डेब्यू, 2012 में बॉलीवुड में धमाल।
यह पोस्ट साबित करता है कि शुरुआती जोश ही सफलता की कुंजी है।