
मुंबई को हिंदी सिनेमा ने हमेशा सपनों का शहर, संघर्ष की मिसाल या अकेलेपन का प्रतीक बनाकर दिखाया है। गलियों से लेकर समुद्र किनारे तक, हर कोने को पर्दे पर उतार दिया गया। लेकिन अब निर्देशक रवि उदयवार का कहना है कि यह शहर फिल्मकारों के लिए पूरी तरह थक चुका है।
अपनी नई रोमांटिक फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ की रिलीज से पहले उन्होंने खुलकर बात की। ‘फिल्ममेकर के नजरिए से मुंबई खत्म हो चुकी है। दर्शकों ने इसके हर हिस्से को देख लिया – सड़कें, इमारतें, लोकल ट्रेनें। अब चुनौती है इन्हें नए अंदाज में पेश करना, खासकर जब शहर खुद बदल रहा हो।’
उन्होंने अपनी फिल्म की विजुअल स्टाइल पर जोर दिया। ‘मैं लुक और माहौल पर गहराई से काम करता हूं। रंग, भावनाएं और कैमरा एंगल तय करना पहला कदम होता है। जब रंग-बत्ती बदलती है, तो कहानी की उथल-पुथल भी महसूस होती है। हर फैसला सोच-समझकर लिया जाता है।’
टीम को श्रेय देते हुए कहा, ‘फिल्म निर्देशक अकेला नहीं बनाता। सिनेमैटोग्राफर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर सब मिलकर जादू रचते हैं। कपड़े, लोकेशन, क्लोज-अप शॉट्स – ये छोटी बातें कहानी को जीवंत बनाती हैं। रंग भावनाओं को और सशक्त करते हैं।’
रोमांस पर बोले, ‘प्यार महसूस कराने के लिए म्यूजिक जरूरी है। हर किरदार की अपनी थीम होती है, जो धीरे-धीरे मिलकर पूरा सफर बनाती है।’
फिल्म में मुंबई तीसरा किरदार है। ‘यह सिर्फ बैकग्राउंड नहीं, बल्कि भावनाओं को प्रभावित करने वाली ताकत है। भीड़, खामोशी सब कहानी का हिस्सा। हमने इसे नये नजरिए से दिखाया है।’
सिद्धांत चतुर्वेदी, मृणाल ठाकुर, संदीपा धर और आयशा रजा की यह फिल्म 20 फरवरी को रिलीज हो रही है।