
हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशक रवि टंडन का नाम आते ही संगीत की मधुर धुनें याद आ जाती हैं। 17 फरवरी 1935 को आगरा में जन्मे रवि का संगीत से गहरा लगाव बचपन से था। कॉलेज के दिनों में वे मुकेश, किशोर कुमार और मोहम्मद रफी के गीत गुनगुनाते रहते थे। दोस्त उन्हें हंसमुख और रचनात्मक बताते हैं।
मुंबई पहुंचकर उन्होंने जूनियर आर्टिस्ट के रूप में करियर शुरू किया। सेट पर फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखते हुए संगीत की ताकत समझी। उनके लिए गाने कहानी का अभिन्न अंग थे, जो भावनाओं को उजागर करते थे।
‘खेल खेल में’ जैसी फिल्म इसका जीता-जागता प्रमाण है। आर.डी. बर्मन का संगीत इसे अमर बना गया। ‘एक मैं और एक तू’, ‘खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे’ जैसे गीतों ने दर्शकों को बांध लिया। रवि का मानना था कि गाने कहानी से जुड़े होने चाहिए।
बेटी रवीना टंडन पिता की इस सोच से प्रेरित रहीं। उन्होंने बताया कि पापा संगीत को जीवन का हिस्सा बनाने की सीख देते थे। ‘अनहोनी’, ‘मजबूर’, ‘नजराना’, ‘खुद्दार’, ‘जवाब’, ‘जिंदगी’ जैसी फिल्मों में संगीतकारों लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल और आर.डी. बर्मन के साथ उनका कमाल दिखा।
11 फरवरी 2022 को 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। हिंदी सिनेमा ने संगीत और कहानी का अनुपम संगम खो दिया, लेकिन उनकी फिल्में हमेशा जीवंत रहेंगी।