
आइजोल। मिजोरम की सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल योजना (एमयूएचसीएस) ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अब तक 11.55 लाख से अधिक लाभार्थियों को इस योजना में शामिल किया गया है। यह जानकारी सोमवार को योजना संचालन समिति की बैठक के बाद दी गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने की।
बैठक में योजना की उपलब्धियों पर चर्चा हुई और आगे की रणनीति तय की गई। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई और एमयूएचसीएस अधिकारियों की मेहनत की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता का विश्वास बढ़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक, लगभग 2.88 लाख परिवार पंजीकृत हैं। इनमें सामान्य परिवार, पेंशनधारक, सरकारी कर्मचारी और आयुष्मान भारत-पीएमजेएवाई के लाभार्थी शामिल हैं। इससे पूरे राज्य में व्यापक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित हुआ है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 29 प्रतिशत पंजीकृत परिवारों ने दावे दाखिल किए, जो कुल लाभार्थियों का करीब सात प्रतिशत है। प्रति मरीज औसत मंजूर राशि 15,106 रुपये रही।
70 प्रतिशत दावे सरकारी अस्पतालों से संबंधित हैं, जो सार्वजनिक सुविधाओं पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। गंभीर रोगों के लिए निजी अस्पतालों में बड़े दावे दर्ज हुए हैं।
बैठक में सरकारी अस्पतालों को सशक्त बनाने और जहां संभव हो वहीं इलाज कराने पर बल दिया गया। आपात स्थिति में गैर-सूचीबद्ध अस्पतालों के लिए रेफरल नियमों को स्पष्ट करने का निर्णय लिया गया।
वित्तीय मोर्चे पर, चालू वर्ष में 154 करोड़ रुपये मिले हैं और 48 करोड़ और अपेक्षित हैं। 83,682 दावों पर 126 करोड़ का भुगतान हो चुका है, जबकि 38 करोड़ के दावे जांचाधीन हैं।
सूचीबद्ध अस्पतालों को 30 दिनों में भुगतान का नियम होने के बावजूद, राज्य सरकार साप्ताहिक भुगतान कर रही है। आने वाले वर्ष के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, सस्ती दवाओं के लिए फार्मा डिपो और दोहरी सदस्यता रोकने के कदम मंजूर किए गए।
मुख्यमंत्री के सलाहकार टी.बी.सी. लालवेंचहुंगा सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। यह योजना मिजोरम के स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति ला रही है।