
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए सीएक्यूएम ने बड़ा कदम उठाया है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को 2026 की गेहूं कटाई में पराली जलाने को पूरी तरह रोकने के लिए राज्य स्तरीय योजनाओं को समयबद्ध ढंग से लागू करने का कानूनी निर्देश जारी किया गया है।
कृषि अवशेष जलाना एनसीआर और आसपास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसरो/एआरआई के प्रोटोकॉल के अनुसार 2025 के अप्रैल-मई में एनसीआर जिलों में कई आग की घटनाएं दर्ज की गईं। आयोग ने संरचित मौसमी तैयारियों पर जोर दिया है।
पहले जारी रूपरेखा के आधार पर राज्य योजनाएं तैयार की गईं, जिनकी 22 दिसंबर 2025 की 26वीं बैठक और राज्य प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में समीक्षा हुई। अब इन्हें अद्यतन कर लागू करना अनिवार्य है।
हर गांव के खेतों का नक्शा बनाकर प्रबंधन विधियों से वर्गीकृत किया जाए। जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त हों, जो 100 किसानों की निगरानी करेंगे। मोबाइल ऐप से सीआरएम मशीनें उपलब्ध होंगी, छोटे किसानों को मुफ्त।
भंडारण सुविधाएं, एक्स-सिटू उपयोग की सप्लाई चेन, जिला योजनाएं जरूरी। जिला/ब्लॉक स्तर पर ‘पराली सुरक्षा बल’ गठित हो, जिसमें पुलिस व अन्य शामिल। शाम की पेट्रोलिंग बढ़े, जागरूकता अभियान चलें।
दिल्ली-राजस्थान को भी प्रयास तेज करने को कहा गया। मासिक रिपोर्ट आयोग को भेजनी होगी, जिससे 2026 तक स्वच्छ हवा सुनिश्चित होगी।