
महाराष्ट्र के मालेगांव में डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगने से उपजा विवाद गरमा गया है। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी ने इसे हिंदू-मुस्लिम विभाजन की साजिश करार देते हुए जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश एक संविधान से बंधा है, जिसमें रानी लक्ष्मीबाई से लेकर टीपू सुल्तान तक सभी वीरों का सम्मान है।
आजमी ने आरोप लगाया कि कुछ तत्व इतिहास को तोड़-मरोड़कर समाज को बांटने का खेल खेल रहे हैं। टीपू की जयंती पर पहले विवाद हुआ था, लेकिन 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे मना लेने की इजाजत दी। उन्होंने टीपू को अंग्रेजों के खिलाफ बहादुर योद्धा बताया, जिनकी आजादी की लड़ाई को कोई मिटा नहीं सकता। मंदिर तोड़ने के इल्जामों पर उन्होंने सबूत मांगे- कब, कौन सा मंदिर?
आजकल धार्मिक स्थलों पर हमले बढ़ रहे हैं, ऐसे में आजमी ने मंदिर-मस्जिद तोड़ने का विरोध किया और भाईचारा कायम रखने की वकालत की। टीपू के शासन में कई इलाकों की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन से बेहतर थी, इतिहास गवाह है कि उन्होंने मंदिरों को दान और संरक्षण दिया। डिप्टी मेयर के दफ्तर में तस्वीर लगाना गलत नहीं, यह निजी पसंद है।
बाबरी मस्जिद का हवाला देकर उन्होंने सवाल उठाया कि इतिहास के साथ ऐसा भेदभाव क्यों? सरकार ऐसे मुद्दों से समाज को तोड़ रही है। दूसरी तरफ, भारत की क्रिकेट जीत पर बधाई देते हुए पाकिस्तान को सबक सिखाने का जिक्र किया। आजमी की यह अपील शांति और एकता की है।