
नई दिल्ली। बांग्लादेश में बीएनपी सरकार के गठन की घड़ी करीब आ गई है। शपथ ग्रहण की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और दक्षिण एशिया की राजनीति में इस बदलाव के गूंज व्यापक होंगी। विभिन्न देशों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जो उनके अलग-अलग हितों को दर्शाती हैं।
नेपाल ने हमेशा गैर-हस्तक्षेप की नीति अपनाई है। वह बीएनपी सरकार को औपचारिक बधाई देगा और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत रखने पर जोर देगा। यदि बीएनपी सार्क या बिमस्टेक के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ाएगी, तो नेपाल के लिए यह स्वागतयोग्य कदम होगा।
भूटान की कूटनीति शांति, विकास और जलविद्युत पर आधारित है। क्षेत्रीय बिजली व्यापार में स्थिरता उसके लिए जरूरी है। बीएनपी यदि ऊर्जा बाजार को प्रोत्साहित करे, तो थिम्फू को फायदा होगा। जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर सहयोग भूटान के एजेंडे में प्रमुख हैं।
श्रीलंका हिंद महासागर में सुरक्षा, बंदरगाह और व्यापार पर नजर रखे हुए है। बांग्लादेश के साथ शिपिंग व मछली पालन सहयोग बढ़ सकता है। चीन संबंधों में संतुलन बनाते हुए कोलंबो व्यावहारिक रुख अपनाएगा। चटगांव बंदरगाह पर चीन की नजर चिंता का विषय है, जहां श्रीलंका स्थिरता सुनिश्चित कर सकता है।
म्यांमार सीमा सुरक्षा और रोहिंग्या मुद्दे पर फोकस करेगा। नई सरकार से संवाद बनाए रखना उसकी प्राथमिकता होगी। दक्षिण एशिया में बीएनपी का शासन क्षेत्रीय समीकरणों को नया आकार देगा।