
जिनेवा। अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे चरण की महत्वपूर्ण वार्ता से ठीक पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जी एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी से गहन चर्चा की। ग्रॉसी ने खुद सोशल मीडिया पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि उन्होंने जिनेवा में होने वाली अहम बातचीत की तैयारी के लिए ईरानी समकक्ष के साथ विस्तृत तकनीकी बातचीत पूरी की।
अराघची ने एक्स पर अपनी योजना का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि न्यूक्लियर विशेषज्ञों के साथ सोमवार को ग्रॉसी से गहन तकनीकी बहस होगी। मंगलवार को अमेरिकी वार्ता से पूर्व ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी से मिलेंगे। उन्होंने जोर दिया कि वे एक सही और समान समझौते के लिए ठोस विचारों लेकर जिनेवा पहुंचे हैं।
आईएईए लंबे समय से ईरान से जून में इजरायल-अमेरिकी हमलों के बाद गायब हुए 440 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक का हिसाब मांग रही है। एजेंसी ने नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे बमबारी वाले स्थानों पर पूर्ण निरीक्षण फिर शुरू करने की मांग की है।
ईरान के उपविदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने अमेरिका से तेहरान के साथ सौदे में गंभीरता दिखाने को कहा। ओमान में अप्रत्यक्ष संपर्कों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन शांतिपूर्ण हल चाहता दिख रहा है। अब गेंद अमेरिका के पाले में है। अगर इरादा साफ है तो समझौता संभव है। उन्होंने युद्ध के बुरे नतीजों की चेतावनी दी।
व्हाइट हाउस ने पुष्टि की कि मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को वार्ता के लिए भेजा गया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्रंप की वार्ता प्राथमिकता बताई, लेकिन सभी विकल्प खुले रखे।
ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है, लेकिन 60 प्रतिशत संवर्धन हथियार ग्रेड के करीब है। ट्रंप प्रशासन संवर्धन को किसी भी हाल में नामंजूर ठहराता है। शुक्रवार को ट्रंप ने यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को मध्य पूर्व रवाना किया और ईरान में सत्ता परिवर्तन की वकालत की।
ये बैठकें क्षेत्रीय स्थिरता का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती हैं। सफलता मिले या नहीं, दुनिया निगाहें लगाए है।