
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत के लिए एक बड़ा अवसर है। यदि भारत उपयोगकर्ता से सर्जक की भूमिका में आता है, तो वैश्विक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर नौकरी के द्वार खोल सकता है।
कोरोवर एआई और भारतजीपीटी के संस्थापक अंकुश सभरवाल ने कहा कि हर नया ऐप एआई पर आधारित है और यह प्रवृत्ति तेज होगी। भारत सर्जक बनकर लाखों रोजगार सृजित कर सकता है, क्योंकि अब सामान्य व्यक्ति भी ऐप बना सकता है।
कृषि क्षेत्र में एफएओ के संजय सेठी ने बताया कि एआई मौसम पूर्वानुमान, फसल आवश्यकताओं का आकलन और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को सुगम बनाएगा। अगले दो-तीन वर्षों में इसका प्रभाव स्पष्ट दिखेगा।
समिट में युवाओं का जोरदार योगदान रहा। अखिला पसुपुलेटी का ‘देश के हाथ’ प्लेटफॉर्म 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के हस्तशिल्प को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाता है, बिचौलियों को हटाकर कारीगरों को लाभ देता है।
सृष्टि पुरोहित का एनरविजन ऐप क्रॉनिक फैटीग सिंड्रोम से जूझते मरीजों के लिए है, जो थकान, नींद और दर्द का प्रबंधन करता है—एक ऐसी बीमारी जिसे भारत में अक्सर कमजोरी माना जाता है।
सुभांगी सिंह का आईजीएसएस सिस्टम अनाज भंडारण की समस्या हल करता है। वास्तविक समय निगरानी, जोखिम पूर्वानुमान और त्वरित अलर्ट से लाखों टन अनाज की बर्बादी रोकी जा सकेगी।
यह समिट भारत की एआई क्षमता को रेखांकित करती है, जो आर्थिक उन्नति और रोजगार वृद्धि का आधार बनेगी।