
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में प्रमुख उद्योग नेताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) अब कोई विलासिता नहीं, बल्कि देश की विशाल आबादी के लिए अनिवार्य आवश्यकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई सेवाओं को लाखों-करोड़ों लोगों तक आसानी से पहुंचाने में क्रांति लाएगा।
क्यूर एआई के सह-संस्थापक और मुख्य उत्पाद अधिकारी अंकित मोदी ने कहा, ‘भारत की बड़ी आबादी एआई विकास के लिए अपार संभावनाएं प्रदान करती है। यह कोई लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत है। विशेषज्ञों की कमी के बावजूद एआई मौजूदा प्रतिभा को बढ़ावा देकर अधिक लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करेगा।’
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्यूर एआई की उपलब्धियों पर मोदी ने बताया, ‘राज्य स्तर के पायलट प्रोजेक्ट्स में हमने टीबी रोगियों का पता लगाने की क्षमता 35 प्रतिशत बढ़ाई है। यह न केवल मरीजों के लिए, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी वरदान है।’
प्रिवासैपियन के सीईओ अभिलाष सुंदरराजन ने कहा, ‘उपभोक्ताओं की बढ़ती निर्भरता से भारत में एआई तेजी से विकसित हो रहा है। सभी क्षेत्रों में लागत घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।’
अमेरिका से लौटे एटलांटो एआई के हरीश अमरावतकर ने भारत को स्टार्टअप हब बताया। ‘यहां से वैश्विक स्तर तक पहुंचना आसान है। समिट युवाओं को अनुभवी नेताओं से जोड़ेगी।’
एसीसीए के नारायण वैद्यनाथन ने 100 से अधिक देशों की भागीदारी की सराहना की। ‘यह उद्योग-शिक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा।’
कुल मिलाकर, समिट ने एआई को भारत की समावेशी प्रगति का आधार बताया।