
बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनाव के नतीजे आने के बाद भी शांति दूर की कौड़ी बनी हुई है। देश के पांच जिलों में हिंसक घटनाओं ने कोहराम मचा दिया है। कम से कम नौ लोग घायल हो चुके हैं और एक घर को आग के हवाले कर दिया गया।
शनिवार रात नटोर जिले के लालपुर में बीएनपी के दो गुटों के आपसी भिड़ंत में छह लोग जख्मी हो गए। स्थानीय पुलिस के प्रमुख मोहम्मद मोजिबुर रहमान ने पुष्टि की कि दो संदिग्धों को पकड़ा गया और एक पिस्तौल जब्त की गई। मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
शेरपुर में जमात-ए-इस्लामी समर्थकों ने बीएनपी कार्यकर्ता गियासुद्दीन रसेल पर हमला किया। 35 वर्षीय रसेल हारी हुई उम्मीदवार संसिला जेब्रिन प्रियंका के चुनाव एजेंट थे।
फेनी जिले के दक्खिन भबानीपुर में बीएनपी ने जमात के नूरुल अबसार बेलाल के घर पर धावा बोला। बेलाल को पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, फिर फेनी जनरल अस्पताल रेफर किया गया।
जमालपुर के दीवानगंज में पत्रकार शम्सुल हुदा रतन पर जुबो दल नेता फारुक अहमद व साथियों ने हमला किया। हिंसा कवर करने गए रतन ने कहा, ‘मैं बीमार हूं, लेकिन पुलिस में शिकायत जरूर करूंगा।’
खुलना के फुलतला में जमात समर्थक शोकर अकुंजी के मशियाली गांव के घर में गैंग ने आग लगा दी। बेटे अब्दुर रज्जाक ने हमलावरों की पहचान न होने का दुख जताया।
ढाका की ह्यूमन राइट्स सपोर्ट सोसाइटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से 14 फरवरी तक चुनावी हिंसा में 10 मौतें, 2503 घायल। 34 को गोली लगी, 500 से अधिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा।
ये घटनाएं बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता को उजागर करती हैं। सरकार को तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि हिंसा थमे और लोकतंत्र मजबूत बने।