
नई दिल्ली में सोमवार को भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आगाज हुआ। इस दौरान वरिष्ठ नीति निर्माताओं ने समावेशी विकास को गति देने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को अनिवार्य करार दिया।
भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि एआई में हर साल की देरी आर्थिक अवसरों को सीमित कर देगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि समावेशी प्रगति के लिए एआई के फायदों का तुरंत उपयोग शुरू करना होगा।
नागेश्वरन ने भारत को वह पहला बड़ा देश बनाने की बात कही जहां मानव समृद्धि और मशीनरी बुद्धि एक-दूसरे को मजबूत करें। सरकार, निजी क्षेत्र, शिक्षाविदों और नीति विशेषज्ञों को ‘टीम इंडिया’ के रूप में एकजुट होने का आह्वान किया।
उन्होंने आधारभूत शिक्षा को सशक्त बनाने और उच्च स्तरीय कौशलों का विस्तार करने पर बल दिया। एआई प्रगति स्वतः नहीं होगी, इसके लिए तैयारी, राजनीतिक संकल्प और मजबूत क्षमता जरूरी है।
शिक्षा-सुधारों से शुरुआत हो, श्रम-गहन सेवा क्षेत्रों का विस्तार हो और नियामक बाधाएं हटें। बिना सुनियोजित प्रयासों के सामाजिक-आर्थिक अस्थिरता का खतरा मंडरा रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने एआई को मानव-केंद्रित और लोकतांत्रिक बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि एआई संसाधनों तक सबकी समान पहुंच होनी चाहिए, जिसमें लोग परिवर्तन के केंद्र में रहें।
एआई आर्थिक विकास का मजबूत इंजन है, जो भारत सहित ग्लोबल साउथ के देशों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। यह समिट भारत के एआई नेतृत्व को मजबूत करने का संकेत देता है।