
नई दिल्ली। वर्ष 2026 का प्रथम सूर्य ग्रहण दर्श अमावस्या पर मंगलवार को होने जा रहा है। पंचांग अनुसार यह वलयाकार ग्रहण है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को आंशिक रूप से ढकेगा और चारों ओर अग्नि की अंगूठी जैसा दृश्य उभरेगा। भारत में कहीं भी यह नजारा नजर नहीं आएगा।
दक्षिणी गोलार्ध में मुख्यतः अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरीशस और दक्षिण अमेरिका के भागों में दिखेगा। भारतीय समय में प्रारंभ दोपहर 3:26 बजे, चरम शाम 5:42 बजे और समाप्ति 7:57 बजे। कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र के साथ।
धार्मिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पूर्व सूतक लगता है, किंतु भारत में अदृश्य होने से सूतक लागू नहीं। दृक पंचांग के अनुसार 17 फरवरी को कोई प्रतिबंध नहीं, शुभ कार्य, पूजन सामान्य रूप से संभव। अमावस्या शाम 5:30 तक, धनिष्ठा रात 9:16 तक, फिर शतभिषा। चंद्र मकर में।
सूर्योदय 6:58, सूर्यास्त 6:13। शुभ मुहूर्त: अभिजित 12:13-12:58, विजय 2:28-3:13, गोधूलि 6:10-6:36, अमृत काल 10:39-12:17। अशुभ: राहुकाल 3:24-4:48, यमगण्ड 9:47-11:11, आडल योग 9:16-6:57। अंटार्कटिका में पूर्ण वलय, अन्य दक्षिणी क्षेत्रों में आंशिक। एशिया, यूरोप आदि से पूर्णतः दूर।