
नई दिल्ली। एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट ने पाकिस्तान और तुर्की को इस्लामी कट्टरपंथ के नए केंद्र के रूप में चिह्नित किया है। सात दशकों बाद भी पाकिस्तान जिम्मेदार देश बनने में नाकाम रहा, वहीं तुर्की पर उग्रवाद को हवा देने के गंभीर आरोप लगे हैं जो विश्व पटल पर चिंता बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने बांग्लादेश में 2024 के छात्र आंदोलन को अप्रत्यक्ष सहयोग देकर दो वर्षों तक हिंसा और अराजकता फैलाई। 12 फरवरी 2026 के चुनावों के बाद स्थिरता लौटी तो सही, लेकिन पूर्वी पाकिस्तान में भारत-विरोधी माहौल बनाने की पाकिस्तानी चालें साफ नजर आईं।
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के पोषण से पाकिस्तान की भूमिका जगजाहिर है। बांग्लादेश के उलझाव के बीच उसने भारत के विरुद्ध नया रणक्षेत्र खोलने की ठानी। कतर, तुर्की, सऊदी अरब से धन-सामग्री और चीन के सहयोग से पाकिस्तान भारत-विरोधी ‘ग्रे जोन’ युद्ध का हथियार बना हुआ है।
पाकिस्तान अलगाववाद भड़काता है और तुर्की-कतर के साथ मिलकर भारत के 20 करोड़ मुस्लिमों को प्रभावित करने की साजिश रचता है। रिपोर्ट ने भारत से तुर्की के प्रति ‘पारस्परिकता’ अपनाने का आग्रह किया। तुर्की भारतीय मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति देकर कट्टरता सिखाता है, इसके जवाब में भारत को कुर्द छात्रों को आमंत्रित कर उनके अधिकारों के लिए प्रशिक्षण देना चाहिए।
जिन्ना के मुस्लिम राष्ट्र की कल्पना नफरत में बदल गई। तुर्की को 21वीं सदी का कट्टरता इंजन बताते हुए रिपोर्ट ने भारत समेत विश्व शक्तियों से इस खतरे को रोकने का आह्वान किया।