
मौसम की अदम्य चालबाजियों से सबसे ज्यादा परेशान बच्चे होते हैं। सुबह की सिहरन, दोपहर की धूप और शाम की ठंडक—ये बदलाव उनके कोमल शरीर को कमजोर कर देते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों इस बात पर सहमत हैं कि इस दौरान रोग प्रतिरोधक शक्ति घट जाती है, जिससे सर्दी-खांसी, बुखार जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
शरीर का संतुलन बिगड़ना ही बीमारी की जड़ है। वैज्ञानिक दृष्टि से वायरस-बैक्टीरिया मौके का फायदा उठाते हैं। इसलिए रोजाना की दिनचर्या में बदलाव लाकर बच्चों को मजबूत बनाना जरूरी है।
सबसे पहले आहार पर ध्यान दें। ताजी हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, अनाज और दूध उत्पाद दें। ये विटामिन-मिनरल से भरपूर होते हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। तले-भुने या बाजार के पैकेट बंद खाने से परहेज करें, ये पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। गुनगुना पानी या हल्दी वाला दूध शरीर को अंदर से मजबूत रखता है।
स्वच्छता अपनाएं। हाथों से ही जर्म्स अंदर घुसते हैं। खाने से पूर्व, खेलने के बाद और शौच के बाद साबुन से हाथ धुलवाएं। यह आदत कई संक्रमणों से बचाव करती है।
पानी की कमी न होने दें। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी, निंबू पानी, छाछ या कोकोनट वॉटर पिलाएं। ये शरीर को शीतल रखते हुए विषाक्त पदार्थ बाहर निकालते हैं।
पर्याप्त नींद अनिवार्य है। सोते समय शरीर रोगों से लड़ने की तैयारी करता है। निश्चित समय पर सोने-उठने की आदत डालें।
इन आसान तरीकों से मौसमी बीमारियों से बच्चों की रक्षा करें। स्वस्थ बच्चे खुशहाल परिवार का आधार होते हैं।