
16 फरवरी 1968 का वह ऐतिहासिक दिन था जब अमेरिका के अलबामा राज्य के छोटे से शहर हैलीविल ने दुनिया को एक नया आपातकालीन नंबर दिया। दोपहर 2 बजे मेयर जेम्स व्हाइट के कार्यालय से अलबामा हाउस के स्पीकर रैंकिन फाइट ने पहली 911 कॉल की। यह कॉल स्थानीय पुलिस स्टेशन पर पहुंची, जहां यूएस रिप्रेजेंटेटिव टॉम बेविल ने फोन उठाकर सिर्फ ‘हैलो’ कहा। यह कोई वास्तविक संकट नहीं था, बल्कि नई प्रणाली का परीक्षण मात्र।
1960 के दशक से पहले अमेरिका में आपात सहायता के लिए कोई एकल नंबर नहीं था। पुलिस, अग्निशमन या एम्बुलेंस के अलग-अलग नंबर होते थे, जिन्हें फोन बुक से खोजना पड़ता। ग्रामीण क्षेत्रों में तो लोग पटाखे फोड़कर या चिल्लाकर मदद मांगते।
परिवर्तन की शुरुआत 1957 में हुई जब नेशनल एसोसिएशन ऑफ फायर चीफ्स ने एकसमान नंबर की मांग की। 1967 में प्रेसिडेंट लिंडन जॉनसन की समिति और एटीएंडटी ने 911 को चुना—यह छोटा, सरल और हर फोन पर काम करने वाला। लेकिन एटीएंडटी की योजना धीमी थी।
अलबामा टेलीफोन कंपनी ने हैलीविल में जल्दबाजी दिखाई। अपने मुख्यालय वाले इस छोटे शहर (जनसंख्या मात्र 4500) में उन्होंने प्रणाली स्थापित कर दी। फाइट की कॉल ने इसे औपचारिक रूप से चालू किया, जो बाद में पूरे देश और दुनिया में फैल गई।
आज 911 लाखों जिंदगियां बचा चुकी है। हैलीविल की यह शुरुआत साबित करती है कि छोटे प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं।