
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में ‘विश्व में चीन’ सत्र को संबोधित करते हुए चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने जापान के खतरनाक रुख पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने जापानी नेताओं द्वारा थाईवान मुद्दे पर की गई गलत बयानबाजी को चीन की संप्रभुता पर सीधी चुनौती बताया।
वांग यी ने कहा कि जापान के वर्तमान प्रधानमंत्री ने थाईवान जलडमरूमध्य में किसी भी घटना को जापान के लिए ‘अस्तित्व का संकट’ करार दिया है। यह युद्ध के बाद 80 सालों में जापानी पीएम का पहला ऐसा बयान है।
जर्मनी से तुलना करते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि जर्मनी ने फासीवाद को जड़ से समाप्त कर दिया, जबकि जापान आज भी युद्ध अपराधियों को पूजता है और उनके मंदिरों में नजराना चढ़ाता है। इससे जापान की विस्तारवादी महत्वाकांक्षाएं साफ झलकती हैं।
उन्होंने जापान से इतिहास से सबक लेने और सच्चा पश्चाताप करने की सलाह दी। शांति चाहने वाले सभी देशों से अपील की कि जापान को गुमराह रास्ते से रोकें, वरना यह उसके विनाश का कारण बनेगा।
अमेरिका-चीन संबंधों पर बोलते हुए वांग यी ने कहा कि दो महाशक्तियों का सह-अस्तित्व विश्व की दशा निर्धारित करता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सिद्धांतों—परस्पर सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और लाभकारी सहयोग—पर चीन अडिग है।
ट्रंप द्वारा शी और चीनी जनता के प्रति सम्मान को सराहा, लेकिन चीन को दबाने की कोशिशों पर चेतावनी दी। सहयोग से लाभ, टकराव से हानि—दो रास्ते हैं। चीन अपनी लाल रेखाओं की रक्षा को तैयार है।
अंत में वांग यी ने विश्वास दिलाया कि सम्मान और सहयोग ही सही मार्ग है, जो अंततः विजयी होगा।