
हैदराबाद, 15 फरवरी। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रविवार को संत सेवलाल जयंती समारोह में अपने विवादास्पद बयान ‘नेने राजू, नेने मंत्री’ को लेकर स्पष्टिकरण दिया। उन्होंने कहा कि इस टिप्पणी का गलत अर्थ निकाला गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह बयान नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान आया था, जो नगर निगम चुनावों के परिणामों की जिम्मेदारी से जुड़ा था। ‘मुख्यमंत्री और नगर प्रशासन मंत्री के नाते मैं चुनावी नतीजों के लिए पूरी तरह जवाबदेह हूं,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
कांग्रेस ने नगर निगम चुनावों में 85-90 प्रतिशत सीटें हासिल कीं, लेकिन रेवंत रेड्डी ने जीत के घमंड से इंकार किया। उन्होंने खुद को जनसेवक बताते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया कि कुछ लोग खुद को स्वभावतः शासक समझते हैं।
संत सेवलाल को 15 करोड़ लंबाडा समुदाय का मार्गदर्शक बताते हुए रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना आंदोलन में उनके योगदान की सराहना की। राज्य सरकार ने उनकी जयंती को आधिकारिक रूप से अपनाया है।
मुख्यमंत्री ने थंडों (आदिवासी बस्तियों) के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं घोषित कीं- सभी जगह बिटुमेन सड़कें, प्रत्येक थंडे में सरकारी स्कूल व पंचायत भवन, सौर ऊर्जा से बिजली आपूर्ति। उन्होंने इंदिरा गांधी द्वारा आदिवासियों को दिए आरक्षण व जमीनों का जिक्र किया।
भूमि की कमी के बावजूद कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर देते हुए रेवंत रेड्डी ने अनुसूचित जातियों को 15 प्रतिशत आबादी होने पर भी 30 प्रतिशत पद दिए जाने का दावा किया। चार मंत्री व विधानसभा अध्यक्ष समेत प्रमुख स्थान अनु.जा. समुदाय को मिले हैं।
20 वर्षों के राजनीतिक सफर में लंबाडा समुदाय का समर्थन मिला, जिसके बदले वे दलित-अनुसूचित जनजाति कल्याण के प्रति प्रतिबद्ध हैं। यह नीतियां तेलंगाना को समावेशी विकास का मॉडल बनाएंगी।