
नई दिल्ली। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के लिए दुनिया भर से आई भारी प्रतिक्रिया भारत को जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है। सरकार ने रविवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह पहल ‘पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस’ की अवधारणा पर आधारित है, जो लोगों, पर्यावरण और प्रगति पर जोर देती है।
16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली में होने वाले इस समिट से पहले तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों- एआई फॉर ऑल, एआई बाय हर और युवा एआई- के फाइनलिस्ट घोषित हो चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने बताया कि इन चुनौतियों का मकसद ऐसे एआई समाधान विकसित करना है जो समाज को सकारात्मक रूप से प्रभावित करें।
60 से अधिक देशों से 4,650 से ज्यादा आवेदन मिले, जिनमें से सख्त जांच के बाद 70 टीमें फाइनल में पहुंचीं। ये टीमें 16-17 फरवरी को भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन में अपने समाधान पेश करेंगी।
एआई फॉर ऑल में 1,350 आवेदन आए, जो स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु, शासन, शिक्षा व वित्तीय समावेशन पर केंद्रित थे। 20 शीर्ष टीमों ने संक्रमण जांच उपकरण, मिट्टी परीक्षण प्रणाली, जलवायु विश्लेषण प्लेटफॉर्म, डिजिटल स्वास्थ्य जांच, साइबर सुरक्षा, औद्योगिक दक्षता उपकरण और शिक्षा सहायक तकनीकें तैयार की हैं।
ये नवाचार वैश्विक दक्षिण के देशों में समान विकास और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं को बढ़ावा देंगे।
एआई बाय हर में 50+ देशों से 800 आवेदन मिले, जो महिलाओं के नेतृत्व वाले एआई को प्रोत्साहित करती है। 30 महिला उद्यमी स्वास्थ्य, सतत विकास, वित्त, रोजगार, कृषि, शिक्षा व डिजिटल व्यापार में काम कर रही हैं। इनमें कैंसर-आंख जांच एआई, बहुभाषी चिकित्सा सहायता, वॉयस-ईएमआर, पोषण तकनीक, क्रेडिट सिस्टम व ईएसजी ऑटोमेशन शामिल हैं।
यह प्रयास भारत की समावेशी डिजिटल प्रगति की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समिट के जरिए भारत नैतिक एआई का नया अध्याय लिख रहा है।