
मुंबई में इन दिनों सिद्धांत चतुर्वेदी की नई फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ को लेकर खासी चर्चा है। 20 फरवरी को रिलीज होने वाली इस फिल्म के प्रमोशन में जुटे अभिनेता ने प्यार, नुकसान और दर्द से जूझने के अपने अनोखे अंदाज पर खुलकर बात की। उनका यकीन है कि सच्ची कला दर्द ही बनाती है, जो अक्सर सबसे कम महत्व दिया जाता है।
सिद्धांत भावनाओं को दबाने के पक्षधर नहीं। ‘बैटमैन मोड’ में आकर दर्द को नियंत्रित करने की बजाय, वे इसे रचनात्मक रूप देते हैं। उन्होंने बताया, “मैं दर्द को दबाता नहीं, बल्कि इसे अपनी कला में उतारता हूं। लिखता हूं, गाने बनाता हूं, नाचता हूं, संगीत सुनता हूं और जो भी अंदर चल रहा है, उसे बाहर निकाल देता हूं।”
परिवार या दोस्तों से बातचीत भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन वे इसे कला के जरिए व्यक्त करना पसंद करते हैं। “वह अफरा-तफरी, वह बर्बादी—यह सब ऊर्जा है। इसे ऐसी चीज में बदल दो जो लोगों को छू ले, तो कमाल हो जाता है।” वर्तमान में जिंदगी का पूरा लुत्फ ले रहे सिद्धांत आगामी फिल्म में बिल्कुल नया अंदाज दिखाएंगे।
रोमांटिक ड्रामा ‘दो दीवाने शहर में’ में संदीपा धर, मृणाल ठाकुर और आयशा रजा उनके साथ हैं। संजय लीला भंसाली प्रोडक्शंस समेत कई बैनर इसकी निर्मिति में जुड़े हैं। सिद्धांत का यह खुलासा कला और भावनाओं के रिश्ते को नई परिभाषा देता है।