
पाकिस्तान भारत के खिलाफ प्रॉक्सी आतंकवाद चला रहा है, लेकिन वैश्विक मंचों की चुप्पी इसे संरक्षण दे रही है। एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन यूएन प्रतिबंधों के बावजूद सक्रिय हैं और घातक हमलों को अंजाम दे रहे हैं।
यूरेशिया रिव्यू में पूर्व सेना अधिकारी नीलेश कुंवर की रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की 1267 निगरानी समिति को ‘कागजी शेर’ बताती है। इसकी 37वीं रिपोर्ट पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025) और लाल किले सुसाइड बम विस्फोट (9 नवंबर 2025) को जेईएम से जोड़ती है। संगठन का महिला विंग जमात-उल-मुमिनात भी वैश्विक जिहाद के लिए उभरा है। फिर भी, रिपोर्ट भारत के इनपुट को बिना जांच के दोहराती है—कोई कार्रवाई नहीं।
ऐसी कमजोरी पाकिस्तान को हौसला देती है। ऑपरेशन सिंदूर (7 मई पिछले साल) में भारत ने बहावलपुर में जेईएम मुख्यालय को नेस्तनाबूद किया, जिससे आंतरिक कलह फैला। अजहर ने 10 परिजनों की मौत कबूल की—साफ प्रमाण कि प्रतिबंधित जेईएम पाक में फल-फूल रहा।
फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी से चले ‘व्हाइट कॉलर’ मॉड्यूल का भंडाफोड़—ज्यादातर डॉक्टर—लाल किले बम प्लॉट से जुड़ा। यह जेईएम की भारत-निकासी को सिद्ध करता है।
रिपोर्ट सलाह देती है: काउंटर-टेरर सिस्टम मजबूत करें, सैन्य के अलावा गैर-हिंसक उपाय अपनाएं जो इस्लामाबाद को महंगा पड़ें। यूएन रिपोर्टें कूटनीतिक हथियार हैं, जो पाक झूठों को बेनकाब करती हैं।
वैश्विक मौन तोड़ना जरूरी। भारत की सतर्कता प्रेरणा है, लेकिन सामूहिक दबाव से ही पाक आतंक कारखाना बंद होगा।