
नई दिल्ली में शनिवार को आयोजित कार्यस्थल पर सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं समान वातावरण (एसएचई-बॉक्स) के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं की कार्यस्थल सुरक्षा केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि देश की न्याय और समानता के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक है।
मंत्री ने बताया कि एसएचई-बॉक्स पोर्टल पर 14.8 लाख से ज्यादा संस्थान पंजीकृत हैं, 60 हजार से अधिक आंतरिक समितियां सक्रिय हैं। पिछले छह सालों में महिला श्रम बल सहभागिता 23 फीसदी से बढ़कर 42 फीसदी पहुंच गई, जो जवाबदेही और महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बड़ा परिवर्तन दर्शाता है।
5 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक बजट का उल्लेख करते हुए उन्होंने जोर दिया कि विकसित भारत 2047 का सपना महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण पर टिका है। एक सशक्त भारत वह होगा जहां हर महिला बेधड़क काम करे और नेतृत्व संभाले।
केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने इसे मौलिक अधिकार करार दिया। 2023-24 में महिला श्रम सहभागिता 41.7 फीसदी, मुद्रा ऋणों का 70 फीसदी महिलाओं को, पीएम स्वनिधि में 44 फीसदी महिलाएं, और 90 लाख स्वयं सहायता समूहों से 10 करोड़ महिलाएं जुड़ीं।
इन आंकड़ों से प्रगति साफ है, लेकिन लक्ष्य हर महिला को हर क्षेत्र में सुरक्षित और सशक्त बनाना है। राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने इसे संवैधानिक कर्तव्य बताया, जबकि पीओएसएच और एसएचई-बॉक्स पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं।
महिला एवं बाल विकास सचिव अनिल मलिक ने 1.5 लाख कार्यस्थलों को जोड़ने और जिला समितियों की सक्रियता पर प्रकाश डाला। 42 फीसदी सहभागिता में 80 फीसदी अनौपचारिक क्षेत्र की महिलाएं हैं, इसलिए प्रयास जारी रखने जरूरी हैं।
भारत महिला सशक्तिकरण की राह पर तेजी से अग्रसर है, जहां समानता वास्तविकता बनेगी।