
नई दिल्ली, 14 फरवरी। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ब्रिक्स आर्थिक समूह को सैन्य संगठन में तब्दील करने की कोई योजना नहीं है। शनिवार को सरकारी समाचार एजेंसी तास को दिए साक्षात्कार में रयाबकोव ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स न तो सैन्य गठबंधन है और न ही आपसी सैन्य सहायता का कोई सामूहिक सुरक्षा तंत्र।
उन्होंने कहा, ‘ब्रिक्स को कभी इस नजरिए से नहीं देखा गया और इसे इस दिशा में मोड़ने की कोई मंशा नहीं है।’ रयाबकोव ने तर्क दिया कि 10 सदस्यीय समूह के कार्यक्षेत्र में सैन्य अभ्यास या हथियार नियंत्रण जैसी कोई बात शामिल नहीं है।
हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में आयोजित नौसैनिक अभ्यास को भी उन्होंने ब्रिक्स कार्यक्रम बताने से इनकार कर दिया। 9 से 16 जनवरी तक चले ‘विल फॉर पीस 2026’ ड्रिल में चीन, ईरान और रूस ने अपनी राष्ट्रीय क्षमता में भाग लिया था, न कि ब्रिक्स के प्रतिनिधि के रूप में।
सदस्य देशों के टैंकरों की सुरक्षा के सवाल पर रयाबकोव ने कहा कि ब्रिक्स लॉजिस्टिक्स सुधार और प्रतिबंधों से निपटने में सक्षम है, लेकिन व्यापक सुरक्षा के लिए अन्य उपाय अपनाने पड़ेंगे।
2009 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन द्वारा स्थापित ब्रिक्स में 2010 में दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ। अब मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान सहित 11 पूर्ण सदस्य और 10 साझेदार देश हैं। ब्रिक्स देशों का व्यापार वैश्विक औसत से कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जो इसके व्यावहारिक योगदान को दर्शाता है।
ईरान के प्रति एकजुटता जताते हुए रयाबकोव ने कहा कि रूस-चीन तेहरान के संपर्क में हैं और अमेरिका के साथ बातचीत के लिए माहौल तैयार कर रहे हैं। अरब मध्यस्थता से अप्रत्यक्ष वार्ता जारी रहेगी, जिस पर ब्रिक्स नजर रखे हुए है।