
नई दिल्ली। केंद्र सरकार की वंदे मातरम गाइडलाइंस पर जमीयत उलमा-ए-हिंद के विरोध के बीच भाजपा नेता यासर जिलानी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि मातृभूमि का सम्मान करना किसी भी हाल में गलत नहीं ठहराया जा सकता।
जिलानी ने कहा कि भारत और दुनिया भर में मुसलमान अल्लाह की इबादत करते हैं। अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम गाते हुए लड़ाई लड़ी और शहादत दी। क्या मदनी साहब अपने बयानों से उन शहीदों को गलत साबित कर रहे हैं?
उन्होंने जमीयत नेताओं पर मुसलमानों को भ्रमित करने का आरोप लगाया। वंदे मातरम इस्लाम के विरुद्ध कैसे हो सकता है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मदनी ने शराब पीने वालों के खिलाफ उतनी ही तीव्रता से आवाज उठाई, जो इस्लाम में हराम है। यह केवल नफरत फैलाने की साजिश है।
युवा मुसलमान भाइयों से अपील करते हुए जिलानी ने कहा कि वंदे मातरम को समझें। यह राष्ट्रीय गीत है, जो समर्पण का प्रतीक है। यह आपके धर्म से अलग नहीं करता। मदनी जैसे बयान सौहार्द बिगाड़ने वाले हैं।
जिलानी ने कांग्रेस और विपक्षी दलों के तथाकथित सेक्युलर नेताओं की लंबे समय से चली आ रही विरोध की आलोचना की। 2014 के बाद यह और तेज हो गया। अब 3 मिनट 10 सेकंड का गान अनिवार्य है। वोट बैंक के लिए मुसलमानों का अहित करना ठीक नहीं। भारतभूमि का वंदन हर पल सही है।