
वाशिंगटन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) विश्व को नई दिशा दे रहा है। भारत को अगली औद्योगिक क्रांति में अग्रणी बनने के लिए डेटा को ‘नेक्स्ट ऑयल’ की तरह महत्व देना होगा। एएमडी के एआई जीपीयू प्रमुख सुनिल पाल ने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से पूर्व यह बात कही। उन्होंने 2026 को एआई का वर्ष बताया।
चैटजीपीटी से प्रेरित यह तकनीक वेब की तरह चौथी औद्योगिक क्रांति का रूप ले रही है। पाल के अनुसार, 2031 तक एआई बाजार 1.7 ट्रिलियन डॉलर का हो जाएगा, जिसमें सभी हिस्सेदारी के लिए उत्सुक हैं। डेटा ही मूल मंत्र है।
भारत के पास एआई प्रतिभा का विशाल भंडार, मजबूत डिजिटल आधार और सेवाओं से नवाचार केंद्रों की ओर संक्रमण है। यह प्रतिभा उद्यमों को एआई को तेजी से सस्ते में विस्तारित करने में मदद करती है।
वैश्विक प्लेटफॉर्म, साइबर सिक्योरिटी, एनालिटिक्स और एआई डेवलपमेंट में भारत की भूमिका उल्लेखनीय है। देश एआई रिसर्च, प्रोडक्ट इंजीनियरिंग, सेमीकंडक्टर डिजाइन और ग्लोबल सेंटर्स के रूप में उभर रहा है। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर निर्णायक होगा।
डेटा सेंटर्स के लिए बिजली सबसे बड़ी चुनौती। उच्च गुणवत्ता वाली ऊर्जा जरूरी। सरकारें हाइड्रो, न्यूक्लियर, विंड, सोलर में लॉन्ग टर्म निवेश करें। यह शॉर्टकट नहीं, समग्र रणनीति चाहिए।
भूमि, मंजूरी प्रक्रियाएं समय लेती हैं। कंप्यूटिंग भौगोलिक सीमाओं से परे। अमेरिका मजबूत, चीन पीछे नहीं। एआई प्रारंभिक अवस्था में। भारत को सतर्क रहना होगा।
एआई सिर्फ खर्च घटाने वाला नहीं, बल्कि राजस्व बढ़ाने वाला – पर्सनलाइजेशन, प्रेडिक्शन से। हेल्थकेयर में रिसर्च तेज। लेकिन डेटा क्वालिटी महत्वपूर्ण।
पांच सालों में एआई भाप इंजन, इंटरनेट जैसा बदलाव लाएगा। न अपनाएं तो पीछे रहें। सही इकोसिस्टम से भारत डेटा को आर्थिक ताकत बना सकता है। समिट वैश्विक निवेशों के दौर में हो रहा है। भारत की सेमीकंडक्टर योजनाएं मजबूत बनाएंगी।