
बर्लिन, 14 फरवरी। जेय सिंध मुत्तहिदा महाज के चेयरमैन शफी बुरफत ने म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर को बुलाए जाने की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे पाकिस्तान में दबे-कुचले समुदायों का अपमान करार दिया।
बुरफत ने कहा कि मुनीर ने पाकिस्तान की राजनीति, न्यायपालिका, व्यापार और मीडिया पर पूर्ण सैन्य नियंत्रण स्थापित कर दिया है। ऐसे में उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति का चेहरा बनाना उपहासजनक है। जर्मनी जैसे लोकतांत्रिक देश में उनके न्योते को उन्होंने पीड़ितों के घावों पर नमक छिड़कना बताया।
सोशल मीडिया एक्स पर बुरफत ने लिखा कि मुनीर सिंधियों, बलूचों और पश्तूनों पर सिस्टमैटिक अत्याचार, जबरन गुमशुदगी, यातनाएं और बेमुकदम हत्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। राजनीतिक कार्यकर्ताओं का अपहरण कर उन्हें यातनाएं दी जाती हैं और उनके क्षत-विक्षत शव डर फैलाने के लिए फेंक दिए जाते हैं।
बुरफत ने संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और मानवाधिकार संगठनों को पत्र लिखकर 13-15 फरवरी के सम्मेलन में पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व की भागीदारी पर नैतिक आपत्ति जताई। सिंध, बलूचिस्तान आदि क्षेत्रों में राजनीतिक दमन, सांस्कृतिक अस्मिता पर हमले और आर्थिक बहिष्कार की शिकायतें आम हैं।
उन्होंने पाकिस्तान द्वारा ओसामा बिन लादेन को पनाह देने का जिक्र कर देश की वैश्विक साख पर सवाल उठाए। यह न्योता पाकिस्तान की सुरक्षा नीतियों पर बहस को तेज कर रहा है। म्यूनिख कॉन्फ्रेंस को मानवाधिकार उल्लंघनों के मद्देनजर इस फैसले पर पुनर्विचार की नसीहत दी।
यह विवाद दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यक समुदायों की आवाज को अंतरराष्ट्रीय पटल पर मजबूत कर रहा है। वैश्विक मंचों को अब दमनकारी नेताओं को मंच देने के परिणामों पर विचार करना होगा।