
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनावों में बीएनपी के तीन हिंदू उम्मीदवारों ने शानदार जीत दर्ज की है। इनमें से एक गायेश्वर चंद्र रॉय ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में कहा कि यह जीत भारत और बांग्लादेश के बीच सम्मान और समानता के रिश्ते को मजबूत करती है।
बीएनपी ने 299 सीटों में से 211 पर कब्जा जमाया, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें नसीब हुईं। रॉय ने अपनी प्राथमिकताओं पर बताया कि सबसे पहले 31 सुधार एजेंडों को पूरा करना होगा, जो हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन से पहले वादा किए गए थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास, कानून व्यवस्था जैसे क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से काम होगा। ‘यह बड़ा काम है, लेकिन हम प्रतिबद्ध हैं,’ उन्होंने कहा।
समुदायों के बीच तालमेल पर रॉय ने बांग्लादेश की सदियों पुरानी एकता का जिक्र किया। पूजा-ईद साथ मनाने की परंपरा से सौहार्द बना रहता है। कानून का राज हर नागरिक को समान अधिकार देता है।
अल्पसंख्यक सुरक्षा के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘हम सब बांग्लादेशी हैं। गरीबी-परेशानी धर्म नहीं देखती। इंसाफ सुनिश्चित हो तो सभी सुरक्षित।’
हिंदू समुदाय के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता मुख्य हैं—बिना किसी भेदभाव के।
धार्मिक एकता को बढ़ावा देने के लिए रॉय ने अपने दुर्गा पूजा कार्यक्रम का उदाहरण दिया, जहां 80 फीसदी मुस्लिम आते हैं। ईद पर भी वे भोज आयोजित करते हैं।
पीएम मोदी की बधाई को उन्होंने लोकतांत्रिक कदम बताया। भारत-बांग्लादेश रिश्ते समानता, लाभ और लोगों पर आधारित होने चाहिए—किसी व्यक्ति या दल पर नहीं। इतिहास इसकी गवाही देता है।