
झारखंड के हजारीबाग जिले में जंगली हाथियों का आतंक चरम पर पहुंच गया है। चूरचू प्रखंड के गोंदवार और कजरी गांवों में गुरुवार-शुक्रवार की मध्यरात्रि को हाथियों के झुंड ने धावा बोल दिया। नतीजा भयानक था- सात ग्रामीणों को पैरों तले कुचल दिया गया। इनमें एक ही परिवार के चार सदस्य भी शुमार हैं, जिससे गांवों में शोक की लहर दौड़ गई।
मृतकों में सूरज राम, सविता देवी, धनेश्वर राम, सुमन देवी और कजरी की फुलमनी किस्कू के नाम शामिल हैं। दो मासूम बच्चे भी इस हादसे का शिकार बने। स्थानीय बताते हैं कि रात के सन्नाटे में हाथी अचानक घरों में घुस आए, जिससे भागने का मौका ही न मिला।
यह पहला मामला नहीं। जनवरी में पश्चिमी सिंहभूम में 22 लोगों की जान गई, जिसमें एक रात में सात मौतें हुईं। फरवरी में बोकारो के गोमिया-पेटरवार में पांच और हताहत। 2023 में रांची के इटकी में चार की मौत पर धारा 144 लगानी पड़ी।
जंगलों का सिकुड़ना, खनन और मार्ग अवरुद्ध होना हाथियों को गांवों की ओर धकेल रहा है। ग्रामीण रातभर पहरे देते हैं, वन विभाग से स्थायी उपाय मांगते हैं। कॉरिडोर संरक्षण, चेतावनी तंत्र और बाड़ाबंदी ही समाधान हैं।