
वॉशिंगटन। बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनावों के परिणाम ने देश की राजनीति को नया मोड़ दिया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जबरदस्त जीत दर्ज की, जो मुख्य रूप से शांतिपूर्ण रही। पूर्व व्हाइट हाउस अधिकारी लिसा कर्टिस ने इसे बांग्लादेशी लोकतंत्र के लिए सकारात्मक दिन बताया, लेकिन जमात-ए-इस्लामी के उभार और संस्थागत क्षति पर चिंता जताई।
कर्टिस ने कहा कि हिंसा की आशंकाओं के बावजूद चुनाव शांतिपूर्ण रहे। बीएनपी की प्रभुत्वपूर्ण सफलता के साथ जमात ने 68 से अधिक सीटें हासिल कीं, जो उनके पारंपरिक 5-7 प्रतिशत वोट से उछाल है।
लगभग 60 प्रतिशत मतदान हुआ, क्योंकि अवामी लीग ने बहिष्कार किया। 70 प्रतिशत मतदाताओं ने प्रधानमंत्री की कार्यकाल सीमा और महिलाओं की भागीदारी जैसे सुधारों का समर्थन किया, जिसे कर्टिस ने उत्साहजनक माना।
जमात के युवा आकर्षण के बावजूद उनके रूढ़िवादी नेता नीतियों को कठोर रख सकते हैं। कर्टिस ने सवाल उठाया कि वे विपक्ष के रूप में कैसे कार्य करेंगे और समाज पर क्या प्रभाव डालेंगे।
बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान को भ्रष्टाचार के आरोपों से उबरना होगा। शेख हसीना सरकार ने संस्थाओं को गहरा नुकसान पहुंचाया, जिसे ठीक करने की जरूरत है।
अमेरिका शांत चुनावों का स्वागत करेगा, लेकिन जमात की ताकत पर सतर्क। भारत ने शुरुआत में हसीना पर दांव लगाया, लेकिन अब बीएनपी के प्रति नरमी दिखा रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर का खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होना इसका प्रमाण है।
बांग्लादेश के समक्ष उम्मीद और चुनौतियां दोनों हैं। संबंधित पक्षों को जुड़ाव बढ़ाना होगा।