
सिलिकॉन वैली के पैलो आल्टो में 11 फरवरी को आयोजित ‘इंडिया-इजरायल एआई-साइबरसिक्योरिटी कनेक्ट’ कार्यक्रम ने भारत और इजरायल के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा साइबर सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा प्रदान की। 130 से अधिक स्टार्टअप संस्थापकों, निवेशकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया, जहां एआई की संभावनाओं के साथ उसके जोखिमों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
सैन फ्रांसिस्को के भारत एवं इजरायल महावाणिज्य दूतावासों तथा वेंचर डॉक द्वारा सह-आयोजित इस आयोजन का लक्ष्य भारत, अमेरिका और इजरायल के मध्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में साझेदारी मजबूत करना था। मुख्य विषय रहा ‘एआई के लिए साइबर सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के लिए एआई’।
भारत के महावाणिज्यदूत डॉ. के. श्रीकर रेड्डी ने दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों तथा तकनीकी प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये तीनों देश नवाचार के केंद्र हैं और जिम्मेदार एआई तथा साइबर सुरक्षा का विकास वैश्विक हित में अनिवार्य है। उन्होंने नई दिल्ली के आगामी एआई इम्पैक्ट समिट का उल्लेख किया, जिसमें 100 से अधिक देश हिस्सा लेंगे। इसका केंद्रबिंदु ‘लोग, ग्रह और प्रगति’ होगा, जिसमें स्वास्थ्य एवं शिक्षा में एआई की भूमिका प्रमुख रहेगी।
इजरायल के महावाणिज्यदूत मार्को सेरमोनेटा ने 1990 के दशक से शुरू हुए कूटनीतिक संबंधों की प्रगति को सराहनीय बताया। एआई, शिक्षा एवं उद्यमिता में बढ़ते सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण शिविरों तथा हैकाथॉन का जिक्र किया। सिलिकॉन वैली को संस्थागत साझेदारी के लिए आदर्श मंच करार दिया।
मुख्य वक्ता, जस्केलर के सीईओ जय चौधरी ने एआई को क्रांतिकारी पर खतरनाक बताया। साइबर विशेषज्ञों की तुलना हृदय सर्जनों से की। एआई के इंटरनेट से भी बड़े प्रभाव की चेतावनी दी। प्रत्येक कर्मचारी के लिए 50-100 एआई एजेंटों की तैनाती की कल्पना की, जिनके हैक होने से समूची प्रणाली जोखिम में पड़ सकती है। स्टार्टअप सफलता का सूत्र मेहनत और जुनून बताया।
पैनल चर्चाओं में डिजिटल परिवर्तन के साथ साइबर खतरों पर चिंता व्यक्त की गई। लाइटस्पीड वेंचर्स के गुरु चहल ने कुशल पेशेवरों की कमी को उद्योग की बड़ी समस्या कहा। एआई से इस कमी को पूरा करने वाले उद्यमी भविष्य के दिग्गज बनेंगे।
यह पहल तकनीकी साझेदारी को मजबूत कर वैश्विक चुनौतियों का सामना करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।