
नई दिल्ली, 14 फरवरी। भगवान शिव और माता पार्वती की दिव्य लीला का प्रतीक महाशिवरात्रि इस वर्ष 15 फरवरी को रविवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। यह रात्रि मात्र उत्सव नहीं, अपितु शिव तत्व की पूर्ण जागृति का पावन संधिकाल है, जहां भक्ति के प्रत्येक क्षण से अपार फल प्राप्त होता है।
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आधारित यह पर्व आध्यात्मिक उन्नयन का प्रतीक है। भक्तजन कठोर व्रत धारण कर शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण व रात्रि जागरण करते हैं। त्रयोदशी 14 फरवरी शाम 5:04 बजे तक, उसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ।
दृक पंचांगानुसार रविवार को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र 7:48 बजे तक, फिर श्रवण। व्यतीपात योग 16 फरवरी रात 2:47 बजे तक। चंद्र मकर में, सूर्योदय 7 बजे, सूर्यास्त 6:11 बजे। शुभ मुहूर्त: ब्रह्म 5:17-6:08, अभिजित 12:13-12:58, अमृत काल 12:59-2:41। सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात:7 से सायं 7:48 तक—सभी कार्य सिद्धि दायक।
अशुभ काल: राहु 4:47-6:11, यमगण्ड 12:35-1:59, गुलिक 3:23-4:47। भद्रा 14 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी प्रात:5:23 तक—नए कार्य टालें। निशिता काल में मुख्य पूजन सर्वोत्तम। काशी से सोमनाथ तक मंदिर जागरणों से गूंजेंगे। यह पर्व नकारात्मकता नाशक व सात्त्विक ऊर्जा प्रदाता है।