
मैनहैटन की संघीय अदालत में एक चौंकाने वाला मोड़ आया जब भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने सिख कार्यकर्ता की हत्या की साजिश में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। 14 फरवरी को मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष पेश होकर 54 वर्षीय गुप्ता ने तीन गंभीर आरोपों—भाड़े के हत्या की साजिश, भाड़े की हत्या और मनी लॉन्ड्रिंग साजिश—को मान लिया।
गुप्ता ने शपथ ग्रहण करने के बाद बताया कि 2023 के वसंत में उन्होंने एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर क्वींस निवासी एक व्यक्ति की हत्या की योजना बनाई। उन्होंने मैनहैटन में 15,000 डॉलर नकद दिए, जिसका उन्हें पूरी जानकारी थी। यह निशाना खालिस्तान समर्थक सिख राजनीतिक कार्यकर्ता था।
अभियोजन पक्ष के पास मजबूत सबूत थे—गुप्त सूत्र, अंडरकवर अधिकारी, व्हाट्सएप संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग, फोन डेटा और पैसे ट्रांसफर का वीडियो। आरोपपत्र में भारत के कैबिनेट सचिवालय के कर्मचारी का भी जिक्र है।
जज ने जिला जज विक्टर मरेरो से दोषस्वीकारण स्वीकार करने की सिफारिश की, जो मान लिया गया। सजा 29 मई 2026 को सुनाई जाएगी। अधिकतम 40 वर्ष की कैद—हत्या साजिश पर 10-10 साल और मनी लॉन्ड्रिंग पर 20 साल। दिशानिर्देशों के तहत छूट संभव है।
अपराध की गंभीरता, रोकथाम, जनसुरक्षा जैसे कारकों पर विचार होगा। गुप्ता को निर्वासन का सामना करना पड़ेगा। इस स्वीकारोक्ति से लंबे मुकदमे और कूटनीतिक तनाव से बचा जा सका। अमेरिकी न्याय विदेशी साजिशों पर सख्ती दिखा रहा है।