
ईरान ने अमेरिका के साथ सकारात्मक संवाद की संभावना जताई है, लेकिन शर्त यह है कि बातचीत यथार्थवादी हो और अनावश्यक मांगों से परे न जाए। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अली शमखानी ने अल जजीरा को दिए साक्षात्कार में यह बात कही, जो शुक्रवार को प्रसारित हुआ।
परमाणु विवाद पर अप्रत्यक्ष वार्ता के फिर शुरू होने के बीच यह बयान आया है। पहला चरण 6 फरवरी को ओमान में हुआ। शमखानी ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए उकसावे वाले कदमों से बचने की सलाह दी।
क्षेत्रीय कूटनीति का लक्ष्य तनाव घटाना और राजनीतिक हल मजबूत करना है। ईरान का मिसाइल कार्यक्रम लाल रेखा है, इस पर कोई समझौता नहीं। आक्रामकता का कड़ा जवाब मिलेगा।
इजरायल अमेरिकी मदद के बिना ईरान पर हमला नहीं कर सकता। ईरान की सैन्य क्षमता उच्चतम है, गलत फैसले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।
तेहरान-वाशिंगटन संबंधों में तनाव है, अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ी, लेकिन कूटनीतिक प्रयास जारी। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी कहा कि परमाणु कार्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव नहीं सहेगा, जांच के लिए तैयार, शांतिपूर्ण उद्देश्य।