
कोलकाता की बेहाला पश्चिम विधानसभा सीट पश्चिम बंगाल की सियासी गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रही है। कोलकाता दक्षिण लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली यह सामान्य श्रेणी की शहरी सीट लंबे समय से बदलावों का साक्षी बनी है। वामपंथी दलों का गढ़ रही यह सीट अब तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला बन चुकी है।
इसकी चुनावी कहानी 1951 से शुरू होती है जब मूल बेहाला सीट बनी। 1952 में फॉरवर्ड ब्लॉक की जीत हुई, उसके बाद 1957-62 में सीपीआई का जलवा। 1967 में इसे पूर्व और पश्चिम में बांटा गया, जो 2006 तक चला। इस काल में वाम ने 11 में से 9 बार जीत हासिल की। 2001 में टीएमसी के पार्थ चटर्जी ने कमाल कर दिया और लगातार सफल रहे।
2011 परिसीमन के बाद नाम बदला और वार्ड 118,119,125-132 शामिल हुए। पार्थ ने सीपीएम को 59,021 वोटों से धूल चटाई। 2016 में अंतर घटा लेकिन 2021 में भाजपा की श्राबंती को 50,884 वोटों से हराया। टीएमसी की पांचवीं लगातार जीत।
लोकसभा में भी दबदबा: 2009 से 2024 तक चार बार बढ़त—35,386, 23,138, 16,165, 15,196 वोट। मतदाता 3.13 लाख से 3.18 लाख।
मतदान विधानसभा में ऊंचा (74-78%), लोकसभा में मध्यम।
औपनिवेशिक विरासत वाला इलाका, जमींदार परिवारों से जुड़ा। चौरास्ता, सखेर बाजार, संग्रहालय, दुर्गा पूजा, फ्लाइंग क्लब। मेट्रो, सड़कें जोड़ती हैं, स्टेशन-एयरपोर्ट नजदीक।
2026 में टीएमसी मजबूत, भाजपा को मेहनत, वाम-कांग्रेस कमजोर। क्या बदलेगा समीकरण?