
फिल्मी सितारों के बच्चे हमेशा से ही कैमरे के सामने रहने का सपना देखते हैं, यह धारणा आम है। लेकिन सकीना जाफरी की जिंदगी इस सोच को चुनौती देती है। प्रसिद्ध अभिनेता सईद जाफरी और मशहूर शेफ मधुर जाफरी की सबसे छोटी बेटी सकीना कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थीं। उनका असली जुनून भाषाओं का था और ट्रांसलेटर बनकर दुनिया को जोड़ना चाहती थीं। थिएटर ने उनकी राह मोड़ दी और हॉलीवुड ने उन्हें अपनाया।
14 फरवरी 1962 को न्यूयॉर्क में जन्मीं सकीना माता-पिता के तलाक के बाद अपनी मां के साथ पलीं-बढ़ीं। घर में कला, साहित्य और संस्कृति का माहौल था, लेकिन सकीना को किताबें और भाषाएं ज्यादा पसंद थीं।
कॉलेज में उन्होंने चाइनीज भाषा व साहित्य चुना। ट्रांसलेटर बनने का सपना उनके मन में घर कर गया था। अभिनय परिवार की परंपरा था, मगर दिलचस्पी नहीं। कॉलेज के दौरान थिएटर से जुड़ने पर सब बदल गया। मंच पर किरदार जीवंत करने का रोमांच उन्हें अपनी ओर खींच ले गया।
17 साल की उम्र में न्यूयॉर्क पब्लिक थिएटर में वालेस शॉन के नाटक ‘मेरी एंड ब्रूस’ से उन्होंने प्रोफेशनल शुरुआत की। फिर छोटे-छोटे रोल निभाते हुए पहचान बनाई।
पिता सईद के साथ ‘मसाला’ और मां मधुर के साथ ‘द परफेक्ट मर्डर’ में काम किया। परिवार के साथ स्क्रीन शेयर करना खास रहा।
अमेरिकी टीवी पर ‘हाउस ऑफ कार्ड्स’ में व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ लिंडा वास्केज बनीं। यह रोल सीरीज का अहम हिस्सा था और स्क्रीन एक्टर्स गिल्ड अवॉर्ड के लिए नामांकन दिलाया। ‘टाइमलेस’ में होमलैंड सिक्योरिटी एजेंट, ‘द मेयरविट्ज स्टोरीज़’, ‘लेट नाइट’ व ‘द इक्वलाइजर 2’ जैसी फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाईं।
सकीना जाफरी की कहानी साबित करती है कि जिंदगी के मोड़ अप्रत्याशित होते हैं। थिएटर ने उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।