
बांग्लादेश में बीएनपी की शानदार जीत के बाद भारत ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर स्पष्ट रुख अपनाया है। पूर्व हाईकमिश्नर वीणा सिकरी ने विशेष बातचीत में कहा कि चुनाव तभी लोकतांत्रिक होते हैं जब वे स्वतंत्र, निष्पक्ष और सभी को साथ लेकर चलने वाले हों।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को एक्स पर बधाई दी और फोन पर बात की। यूनुस की अंतरिम सरकार को सिकरी ने असंवैधानिक बताया, जो अवामी लीग हटाने का परिणाम मात्र था। 18 महीनों में अल्पसंख्यकों पर हिंसा चरम पर रही—परिवार बर्बाद, संपत्ति छीनी गई, कारोबार तबाह।
महिलाओं की दशा दयनीय रही, हिंसा, कपड़ों पर पाबंदी, बिंदी तक पर ऐतराज। इससे असुरक्षा बढ़ी, चुनाव हुए लेकिन समावेशी नहीं। पश्चिमी देशों ने जमात-ए-इस्लामी के पाकिस्तान समर्थित प्रभाव को बढ़ावा दिया।
जमात ने संस्थाओं पर कब्जा कर लिया—न्यायाधीश, विद्वान, नौकरशाह बदले। वोट इंजीनियरिंग से जीत की उम्मीद थी, लेकिन बीएनपी की सफलता कट्टरवाद के विरुद्ध वोट है। शरिया की मांग अमेरिकी दबाव में हटी।
हसीना काल में भारत से संबंध मजबूत हुए, अर्थव्यवस्था चमकी। यूनुस ने इसे बिगाड़ा, आर्थिक संकट से लोग नाराज। भारत ने समावेशी लोकतंत्र का समर्थन किया, अवामी लीग पर बैन हटाने का संकेत। नई सरकार से भारत के साथ मजबूत साझेदारी की उम्मीद।