
रेल मंत्रालय ने ट्रेन टिकट बुकिंग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। 2025 में 3.03 करोड़ संदिग्ध यूजर आईडी को निष्क्रिय कर दिया गया, जिसकी जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा में दी। आधार प्रमाणीकरण और बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा के दम पर यह सफलता हासिल हुई है, जो वास्तविक यात्रियों के लिए बिना रुकावट बुकिंग का रास्ता साफ करती है।
मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2025 तक छह माह में 6,043 करोड़ दुर्भावनापूर्ण बॉट अनुरोधों को रोका गया। नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर 3.99 लाख संदिग्ध बुकिंग से जुड़ी 376 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि 12,819 संदिग्ध ईमेल डोमेन ब्लॉक किए गए।
तत्काल कोटे में दुरुपयोग रोकने को ऑनलाइन बुकिंग के लिए आधार-ओटीपी सत्यापन अनिवार्य किया गया है। यह तत्काल की समयसंवेदी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए यात्रियों की पहचान तुरंत सुनिश्चित करता है।
एप्लीकेशन स्तर पर स्क्रिप्टिंग, ब्रूट फोर्स और डीडीओएस हमलों से बचाव के लिए बहुस्तरीय कैप्चा सिस्टम तैनात हैं। ओडब्ल्यूएएसपी दिशानिर्देशों के तहत सुरक्षा उपाय लागू कर कमजोरियों को दूर किया गया। प्रदर्शन सुधारने हेतु सीडीएन से स्टैटिक कंटेंट ऑफलोड किया जा रहा है।
एकेएएमएआई जैसे एंटी-बॉट उपकरण अवैध यूजर्स को छानते हैं, जिससे वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता मिलती है। ये प्रयास भारतीय रेलवे को धोखाधड़ी मुक्त बनाते हुए लाखों यात्रियों का भरोसा जीत रहे हैं।